Bulati Hai Magar Jane Ka Nahin ghazal – Rahat Indori

Rahat Indori – Bulati Hai Magar Jane Ka Nahin :-

कठिन शब्द :- नई – नहीं, कुशादा ज़र्फ़ – सहनशील, वबा – महामारी

TYPE – 1

Bulati Hai Magar Jaane Ka Nahi Rahat Indori

बुलाती है मगर जाने का नई
ये दुनिया है इधर जाने का नई

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नई

कुशादा ज़र्फ़ होना चाहिए
छलक जाने का भर जाने का नई

सितारे नोंच कर ले जाऊँगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नई

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर ज़ालिम से डर जाने का नई

TYPE – 2

Bulati Hai Magar Jane Ka Nahin Rahat Indori

बुलाती है मगर जाने का नई
ये दुनिया है इधर जाने का नई

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नई

सितारे नोंच कर ले जाऊँगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नई

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नई

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर ज़ालिम से डर जाने का नई

TYPE – 3

Bulati Hai Magar Jaane Ka Nahin Rahat Indori

बुलाती है मगर जाने का नई
ये दुनिया है इधर जाने का नई

जमीं भी सर पे रखनी हो तो रक्खो
चले हो तो ठहर जाने का नई

सड़क पर अर्थियाँ ही अर्थियाँ हैं
अभी माहौल मर जाने का नई

है दुनिया छोड़ना मंज़ूर लेकिन,
वतन को छोड़ के जाने का नई

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नई

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर ज़ालिम से डर जाने का नई

Bulati Hai Magar Jane Ka Nahin
Ye Duniya Hai Idhar Jane Ka Nahin

Jameen Bhi Sar Pe Rakhni Ho To Rakkho
Chale Ho To Thahar Jaane Ka Nahin

Sadak Par Arthiyan Hi Aartiyan Hai
Abhi Mahaul Mar Jane Ka Nahin

Hai Duniya Chhodna Manzur Lekin
Vatan Ko Chhod Ke Jane Ka Nahin

Mere Bete Kisi Se Ishq Kar
Magar Had Se Gujar Jane Ka Nahin

Wo Gardan Napta Hai Naap Le
Magar Zalim Se Dar Jane Ka Nahin


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