दो पत्थरों की प्रेरणादायक कहानी – Two Stones Motivational Story In Hindi

दो पत्थरों की प्रेरणादायक कहानी – Two Stones Motivational Story In Hindi:- बहुत समय पहले, एक रामपुर नाम का गाँव हुआ करता था। जिसमे मुरली नाम का एक प्रतिभावान मूर्तिकार रहता था। उस गाँव में एक नये मंदिर का निर्माण हो रहा होता है जिसके लिए एक सुंदर भगवान की मूर्ति की आवश्यकता होती है। क्योकि मुरली गॉँव का सबसे प्रतिभावान मूर्तिकार होता है इसलिए मूर्ति निर्माण का यह कार्य उसे ही दिया जाता है।

दो पत्थरों की प्रेरणादायक कहानी – Two Stones Motivational Story In Hindi

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मुरली को मूर्ति के लिए एक अच्छे पत्थर की आवश्यकता होती है जिसकी खोज में, वह जंगल की ओर जाता है। कि अचानक रास्ते में, उसे एक पत्थर दिखाई देता है।

मूर्ति के निर्माण के लिए मुरली को वह पत्थर बहुत अच्छा नजर आता है। जिसके बाद वह उसी पत्थर से मूर्ति निर्माण करने का निश्चय करता है।

लेकिन जैसे ही वह पत्थर पर अपनी छैनी और हथौड़े से पहला प्रहार करता है कि अचानक एक जोर की आवाज आती है STOP….. मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

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यह सुन कर मुरली पूरी तरह से चौंक जाता है। और इधर उधर देखने लगता है लेकिन उसे कोई भी नजर नहीं आता।

इसके बाद वह पत्थर पर फिर से एक प्रहार और करने ही वाला होता है। कि उसे दुबारा एक आवाज और सुनाई पड़ती है ।

मुझे माफ़ कर दो, मैं इतना दर्द नहीं सह सकता…. तुम किसी और पत्थर से मूर्ति का निर्माण कर लो लेकिन मुझे माफ़ कर दो। जिसके बाद मुरली सब कुछ समझ जाता है कि ये आवाजे इस पत्थर से ही आ रही है।

इतना सब सुन कर मुरली उस पत्थर को छोड़कर किसी अन्य पत्थर की तलाश में निकल जाता है।

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कुछ ही दूरी पर उसे दूसरा पत्थर भी मिल जाता है। और वो फिर से अपना काम शुरू कर देता है

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इसके बाद, वह दूसरे पत्थर पर एक के बाद एक कई चोट करता है। परन्तु पहले पत्थर के विपरीत दूसरे पत्थर से कोई आवाज नही आती।

कुछ समय बाद, मुरली दूसरे पत्थर से पूँछता है कि क्या तुम्हें कोई दर्द नही हो रहा।

दूसरा पत्थर कहता है कि बिल्कुल मुझे दर्द हो रहा है। लेकिन तुम अपना काम करते रहो। और कुछ ही समय में एक सुंदर मूर्ति तैयार हो जाती है।

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जब मंदिर का पुजारी मूर्ति को लेने के लिए मुरली के पास आता है। तो उसे मुरली द्वारा बनाई गयी वह मूर्ति बहुत पसंद आती है वह बहुत खुश हो जाता है। और उसके काम की बहुत सराहना करता है।

मूर्ति को अपने साथ मंदिर ले जाते समय उसकी नजर दूसरे पत्थर ( जो छैनी और हथौड़े की चोट नहीं सह पाता ) पर पड़ती है।

वह मुरली से पूँछता है कि क्या ये दूसरा पत्थर तुम्हारे किसी काम का है क्या मैं इसे भी अपने साथ ले जा सकता हूँ।

मुरली, पुजारी से कहता है कि ये पत्थर मेरे किसी काम का नही है। लेकिन तुम इसका क्या करोगे ये तुम्हारे क्या काम आयेगा।

पुजारी कहता है कि इसे हम मंदिर के बाहर रख देंगे। जिससे की जब लोग मन्दिर में मूर्ति के दर्शन के लिए आएँगे। तो ये पत्थर नारियल के फोड़ने के काम आयेगा।

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अगर इस कहानी का एक वाक्य में निष्कर्ष निकला जाये तो हम यह कह सकते है कि

बिना कष्ट किये फल नहीं मिलता। ( “No Pain No Gain” )

आपको दो पत्थरों की प्रेरणादायक कहानी – Two Stones Motivational Story In Hindi से क्या शिक्षा मिलती है आप हमे कमेंट बॉक्स में बता सकते है।

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